BCI ने वकालत में नामांकन फीस ₹750 से बढ़ाकर ₹22,500 करने का प्रस्ताव रखा, जानिए ड्राफ्ट बिल 2026 की बड़ी बातें
BCI Enrollment Fee Hike 2026: वकालत की नामांकन फीस ₹22,500 करने का प्रस्ताव
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| BCI Enrollment Fee 2026 |
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने Advocates (Amendment) Bill 2026 के तहत वकीलों की नामांकन फीस ₹750 से बढ़ाकर ₹22,500 करने का प्रस्ताव दिया है। जानिए नए नियम, छूट और कानूनी शिक्षा से जुड़े बड़े बदलाव।
BCI ने वकीलों की नामांकन फीस बढ़ाने का दिया प्रस्ताव
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने Draft Advocates (Amendment) Bill, 2026 के तहत नए वकीलों के नामांकन (Enrollment) की वैधानिक फीस को ₹750 से बढ़ाकर ₹22,500 करने का प्रस्ताव रखा है। इस ड्राफ्ट बिल को सार्वजनिक सुझावों (Public Consultation) के लिए जारी किया गया है।
इस प्रस्ताव के साथ BCI ने कानूनी शिक्षा, अधिवक्ता प्रशिक्षण, संस्थागत निगरानी (Institutional Oversight) और प्रोफेशनल डेवलपमेंट से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुधार भी प्रस्तावित किए हैं।
नई नामांकन फीस कितनी होगी-
ड्राफ्ट बिल के अनुसार Advocates Act, 1961 की धारा 24 में संशोधन किया जाएगा। प्रस्तावित नई फीस इस प्रकार होगी—
- ₹18,000 संबंधित राज्य बार काउंसिल (State Bar Council) को
- ₹4,500 बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को
- इस प्रकार कुल नामांकन शुल्क ₹22,500 होगा।
जुलाई अंत तक मांगे गए सुझाव
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस ड्राफ्ट बिल पर सभी संबंधित पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।
- इनमें शामिल हैं—
- राज्य बार काउंसिल
- बार एसोसिएशन
- लॉ यूनिवर्सिटी
- विधि शिक्षा संस्थान
- लॉ फर्म
- अन्य हितधारक
फीस बढ़ाने की जरूरत क्यों बताई गई-
BCI के अनुसार मौजूदा नामांकन शुल्क 1993 से अपरिवर्तित है, जबकि इस दौरान परिषद की जिम्मेदारियां काफी बढ़ चुकी हैं।
ड्राफ्ट बिल में कहा गया है कि संशोधित शुल्क का उपयोग निम्न कार्यों के लिए किया जाएगा—
- शैक्षणिक योग्यता का सत्यापन
- पहचान (Identity Verification)
- डिजिटल एवं फिजिकल रिकॉर्ड का रखरखाव
- नामांकन प्रमाणपत्र जारी करना
- अधिवक्ताओं के लिए बीमा एवं मेडिक्लेम योजनाएं
- प्रोफेशनल डेवलपमेंट प्रोग्राम
- नेशनल लीगल एकेडमी की स्थापना
- अन्य संस्थागत सेवाएं
BCI ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के Gaurav Kumar v. Union of India तथा Pankaj Sinha v. Bar Council of India मामलों में दिए गए निर्णयों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
SC, ST और दिव्यांग अभ्यर्थियों को मिलेगी बड़ी राहत
ड्राफ्ट बिल में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा Benchmark Disabilities वाले अभ्यर्थियों को विशेष छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।
इन श्रेणियों के उम्मीदवारों को केवल निर्धारित नामांकन शुल्क का 25% ही जमा करना होगा।
कानूनी शिक्षा में होंगे बड़े बदलाव
Draft Advocates (Amendment) Bill, 2026 के तहत BCI को कानूनी शिक्षा से जुड़े कई नए अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव है।
इनमें शामिल हैं—
- लॉ कोर्स में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करना
- न्यूनतम प्रवेश योग्यता तय करना
- All India Bar Examination (AIBE) के नियम बनाना
- विधि शिक्षण संस्थानों की मान्यता देना
- विदेशी कानून डिग्रियों की मान्यता तय करना
लीगल एजुकेशन कमेटी होगी और मजबूत
वर्तमान में लीगल एजुकेशन कमेटी में 10 सदस्य हैं।
ड्राफ्ट बिल के अनुसार इसकी संख्या बढ़ाकर 25 सदस्य करने का प्रस्ताव है।
नई समिति में शामिल होंगे—
- न्यायपालिका के प्रतिनिधि
- केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रतिनिधि
- विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ
- विधि शिक्षाविद
- वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कानूनी पेशे से जुड़े विशेषज्ञ
वकीलों के लिए Continuing Legal Education पर जोर
ड्राफ्ट बिल के तहत Continuing Legal Education (CLE) को बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिलों का वैधानिक दायित्व बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निम्न विषय शामिल हो सकते हैं—
- संवैधानिक कानून
- कॉर्पोरेट एवं कमर्शियल लॉ
- मध्यस्थता (Arbitration)
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- साइबर लॉ
- टैक्सेशन
- दिवाला एवं दिवालियापन कानून (Insolvency)
- अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रैक्टिस
- ट्रायल एवं अपीलीय वकालत
BCI का कहना है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य अधिवक्ताओं की पेशेवर क्षमता को मजबूत करना और उन्हें आधुनिक कानूनी विषयों से अपडेट रखना है।
चलते-चलते
आपको बताते चलें कि अभी ये केवल प्रस्ताव मात्र है, इसके लागू होने की अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है, कई लोग इसके लागू होने की भ्रामक खबरें फैला रहे है तो ऐसी खबरों पर भरोसा न करें
Draft Advocates (Amendment) Bill, 2026 भारतीय कानूनी व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलावों का संकेत देता है। नामांकन शुल्क में भारी वृद्धि के साथ-साथ कानूनी शिक्षा, प्रशिक्षण और अधिवक्ताओं के कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो नए वकीलों के लिए नामांकन प्रक्रिया महंगी होगी, लेकिन BCI का मानना है कि इससे अधिवक्ताओं को बेहतर सुविधाएं, डिजिटल सेवाएं और पेशेवर विकास के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।

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