MOOT COURT 3 : Moot Court Memorial (प्रतिवादी की ओर से) Ravindra Kumar Versus PIO, KDA
माननीय राज्य सूचना आयोग, उत्तर प्रदेश के समक्ष
(सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत अपीलीय क्षेत्राधिकार)
मूट कोर्ट वाद संख्या: 03/2026
रविन्द्र कुमार ……… अपीलकर्ता
बनाम
लोक सूचना अधिकारी, कानपुर विकास प्राधिकरण ……… प्रतिवादी
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प्रतिवादी (PIO) की ओर से मेमोरियल
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1. प्रस्तावना (Introduction)
यह मेमोरियल प्रतिवादी की ओर से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें यह सिद्ध किया जाएगा कि अपीलकर्ता द्वारा मांगी गई सूचना सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8 के अंतर्गत अपवर्जित (exempted) है तथा सूचना न देना विधिसम्मत एवं न्यायोचित है।
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2. अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction)
माननीय राज्य सूचना आयोग को धारा 19(3), सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत इस वाद की सुनवाई का अधिकार है।
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3. तथ्यों का संक्षिप्त विवरण (Brief Facts)
- अपीलकर्ता ने RTI आवेदन प्रस्तुत किया
- मांगी गई सूचना में लाभार्थियों की सूची, चयन मापदंड एवं फाइल नोटिंग शामिल है
- PIO ने धारा 8(1)(j) एवं 8(1)(d) के तहत सूचना देने से इंकार किया
- प्रथम अपील खारिज हुई
- वर्तमान में द्वितीय अपील लंबित है
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4. विचारणीय प्रश्न (Issues)
1. क्या मांगी गई सूचना धारा 8 के अंतर्गत अपवर्जित है?
2. क्या निजता (Privacy) की रक्षा सूचना के अधिकार से अधिक महत्वपूर्ण है?
3. क्या कोई व्यापक जनहित सूचना के प्रकटीकरण को उचित ठहराता है?
4. क्या फाइल नोटिंग एवं आंतरिक पत्राचार प्रकट किए जा सकते हैं?
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5. तर्क (Arguments Advanced)
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मुद्दा 1: मांगी गई सूचना धारा 8 के अंतर्गत अपवर्जित है
- धारा 8(1)(j): व्यक्तिगत जानकारी का संरक्षण
- लाभार्थियों की सूची में व्यक्तिगत विवरण शामिल हैं
- इसका प्रकटीकरण निजता का उल्लंघन होगा
Case Law:
Girish Ramchandra Deshpande v. CIC
→ व्यक्तिगत सूचना RTI के तहत नहीं दी जा सकती जब तक जनहित सिद्ध न हो
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मुद्दा 2: निजता का अधिकार सर्वोपरि है
- • निजता, संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार है
Case Law:
• Justice K.S. Puttaswamy v. Union of India
→ निजता एक मौलिक अधिकार है
• व्यक्तिगत लाभार्थियों की जानकारी उजागर करना उनके अधिकारों का हनन होगा
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मुद्दा 3: धारा 8(1)(d) – व्यावसायिक गोपनीयता
- आवंटन प्रक्रिया में प्रशासनिक विवेक एवं आंतरिक मूल्यांकन शामिल है
- इन दस्तावेजों का प्रकटीकरण प्रशासनिक कार्यप्रणाली को प्रभावित करेगा
Case Law:
CBSE v. Aditya Bandopadhyay
→ आंतरिक प्रक्रियाओं की सुरक्षा आवश्यक है
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मुद्दा 4: फाइल नोटिंग एवं आंतरिक पत्राचार
- फाइल नोटिंग निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है
- इनका खुलासा प्रशासनिक स्वतंत्रता को बाधित करेगा
Case Law:
• Union of India v. R.S. Khan
→ सभी आंतरिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जा सकते
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मुद्दा 5: कोई व्यापक जनहित सिद्ध नहीं हुआ
- अपीलकर्ता ने केवल आरोप लगाए हैं, ठोस प्रमाण नहीं
- जनहित के नाम पर निजता का उल्लंघन उचित नहीं
Case Law:
Bihar Public Service Commission v. Saiyed Hussain Abbas Rizwi
→ जनहित को स्पष्ट रूप से स्थापित करना आवश्यक है
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6. प्रासंगिक विधि (Relevant Laws)
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
- धारा 8(1)(j)
- धारा 8(1)(d)
- धारा 19
भारतीय संविधान
- अनुच्छेद 21 (निजता का अधिकार)
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7. प्रार्थनाएँ (Prayer)
अतः माननीय आयोग से निवेदन है कि:
1. अपील को निराधार मानते हुए खारिज किया जाए
2. PIO के निर्णय को वैध घोषित किया जाए
3. धारा 8 के अपवादों को लागू किया जाए
4. न्यायहित में अन्य उपयुक्त आदेश पारित किया जाए
(प्रतिवादी के अधिवक्ता)
Manoj Kumar
Memorial की PDF
Moot Court Memorial (अपीलकर्ता की
ओर से)
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प्रतिवादी (PIO) की ओर से प्रस्तुत मेमोरियल
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MOOT COURT PROBLEM – 3: Ravindra Kumar (Appellant) Versus PIO, KDA (Respondent)
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(नोट: ये मेमोरियल केवल सैम्पल मात्र है, कोई विधिक सलाह नहीं।)

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