UP SI Exam: पेपर में गडबडी पर योगी की फटकार- ये है मामला, Touch here
उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा 2026 के पहले दिन ही विवादों में घिर गई है। 14 मार्च 2026 को आयोजित परीक्षा के सामान्य हिंदी पेपर में पूछा गया एक सवाल अब पूरे प्रदेश में सियासी और सामाजिक बवाल खड़ा कर चुका है।
| UP SI Exam: पेपर में गडबडी पर योगी की फटकार |
UP SI Exam: अवसरवादी का ऑप्शन 'पंडित' देने पर विवाद
सवाल था-
“अवसर के अनुसार बदल जाने वाला” या “अवसर के अनुसार बदल जाने वालों के लिए एक शब्द”।
इसके चार विकल्प दिए गए थे-
- पंडित,
- अवसरवादी,
- निष्कपट
- सदाचारी।
सही उत्तर ‘अवसरवादी’ था,
लेकिन विकल्प में ‘पंडित’ शब्द को शामिल करने पर ब्राह्मण समुदाय और भाजपा नेताओं समेत कई संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई है।
ये है पूरा मामला-
विवाद की जड़ यह है कि ‘पंडित’ शब्द का पारंपरिक अर्थ विद्वान, ज्ञानी और धार्मिक सम्मान से जुड़ा है। इसे नकारात्मक अर्थ वाले ‘अवसरवादी’ के विकल्प के रूप में रखना समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना गया।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय ने कहा कि अन्य विकल्प गुण या दोष दर्शाते हैं, लेकिन ‘पंडित’ किसी खास जाति-वर्ग को लक्ष्य करता है। उन्होंने इसे ब्राह्मणों के प्रति विद्वेष बताते हुए प्रश्न पत्र बनाने वाले एक्सपर्ट की मानसिकता पर सवाल उठाया।
सोशल मीडिया पर भी इस सवाल को लेकर उबाल है। कई यूजर्स ने इसे “जातिवादी मानसिकता” और “समाज को बांटने की साजिश” करार दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग
भाजपा के अंदर से भी विरोध की आवाजें उठीं। भाजपा प्रदेश सचिव अभिजात मिश्रा (स्वयं ब्राह्मण) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने लिखा, “पंडित शब्द ज्ञान और सम्मान का प्रतीक है।
इसे अवसरवादी से जोड़ना अनुचित, असंवेदनशील और शायद जानबूझकर किया गया है।” बदायूं के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी, बांदा सदर के प्रकाश द्विवेदी और बदलापुर के रमेश चंद्र मिश्रा जैसे ब्राह्मण विधायकों ने भी सीएम को पत्र भेजा। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट कहा, “यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं। हमें भी आपत्ति है। जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने तुरंत संज्ञान लिया
यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने तुरंत संज्ञान लिया और जांच के आदेश दे दिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी भर्ती बोर्डों को निर्देश जारी कर कहा कि जाति-धर्म को लेकर कोई भी अमर्यादित सामग्री न हो। विपक्ष ने भी मुद्दे को उठाया। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष हिंदवी ने इसे “जातिवाद की मिसाल” बताया। हिंदू महासभा समेत कई संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर ली।
यह विवाद सिर्फ एक सवाल तक सीमित नहीं। यूपी में लाखों युवा पुलिस भर्ती की परीक्षा देते हैं। ऐसे में प्रश्न पत्र की संवेदनशीलता अत्यंत जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा आयोजक संस्थाएं अब विशेष रूप से सांप्रदायिक या जातीय संवेदनशील शब्दों पर ध्यान दें। पेपर सेट करने वाले एक्सपर्ट की स्क्रीनिंग और बहुस्तरीय समीक्षा की मांग जोर पकड़ रही है।
UP SI परीक्षा में 60,000 से ज्यादा पदों के लिए लाखों अभ्यर्थी बैठे
दरअसल, UP SI परीक्षा में 60,000 से ज्यादा पदों के लिए लाखों अभ्यर्थी बैठे हैं। एक गलती पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर देती है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी। बोर्ड ने भी कहा कि यदि समुदाय की गरिमा आहत हुई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।
टिप्पणी
यह घटना याद दिलाती है कि सरकारी परीक्षाओं में भाषा और शब्द चयन कितना महत्वपूर्ण है। ‘पंडित’ जैसे शब्दों का दुरुपयोग न केवल समुदाय को आहत करता है, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी ठेस पहुंचाता है। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट क्या कहती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल, विवाद ने यूपी की राजनीति को फिर से जाति और समुदाय के मुद्दे पर केंद्रित कर दिया है।
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