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ADR Practical LLB: एडीआर के प्रेक्टीकल में क्या क्या पूँछा जाता है, ये है Viva के प्रश्न

ADR Practical LLB: एडीआर के प्रेक्टीकल में क्या क्या पूँछा जाता है, ये है Viva के प्रश्न

अगर आपको भी है प्रेक्टीकल, तो यहां मिलेगी आपको पूरी जानकारी, देखिये ये आर्टीकल

ADR Practical LLB: एडीआर के प्रेक्टीकल में क्या क्या पूँछा जाता है, ये है Viva के प्रश्न

1. ADR क्या है?

उत्तर: वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) पारंपरिक अदालती मुकदमेबाजी के बाहर विवादों को सुलझाने की विधियों को संदर्भित करता है। इसमें मध्यस्थता, सुलह, मेडिएशन, बातचीत और लोक अदालत जैसे तरीके शामिल हैं, जो तेजी से, कम खर्चीले और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान प्रदान करते हैं।

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2. ADR को और किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर: ADR को बाह्य विवाद समाधान (External Dispute Resolution) के नाम से भी जाना जाता है।

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3. ADR के लिए अभियान की शुरुआत किस देश ने की?

उत्तर: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) ने ADR तंत्र को लोकप्रिय बनाने और अभियान चलाने का श्रेय प्राप्त है।

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4. ICADR क्या है?

उत्तर: ICADR का पूरा नाम अंतरराष्ट्रीय वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र (International Centre for Alternative Dispute Resolution) है, जो दिल्ली, भारत में स्थित है। यह प्रशिक्षण, अनुसंधान और विवाद समाधान के लिए सुविधाएं प्रदान करके ADR को बढ़ावा देता है।

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5. ADR किन क्षेत्रों में प्रभावी रूप से काम करता है?

उत्तर: ADR निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रभावी है:
उपभोक्ता संरक्षण
पारिवारिक मामले
व्यावसायिक विवाद
निजी अंतरराष्ट्रीय कानून
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) मामले

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6. ADR की परिभाषा दें।

उत्तर: ADR एक ऐसी तकनीक है जिसमें तटस्थ तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से विवाद का समाधान किया जाता है, जिसका निर्णय पक्षकारों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होता, और इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के लिए उपयुक्त समाधान प्रदान करना है।

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7. भारत में ADR की वैधानिक मान्यता क्या है?

उत्तर:
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908: आदेश 32A, नियम 3, और धारा 89 (1999 में संशोधित)।
औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947: धारा 12 सुलह के लिए प्रावधान करती है।
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955: धारा 23 सुलह को बढ़ावा देती है।
पारिवारिक न्यायालय अधिनियम, 1984: वैवाहिक विवादों के लिए परामर्श को प्रोत्साहित करता है।
मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996: UNCITRAL मॉडल को अपनाता है।
कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987: लोक अदालत को नियंत्रित करता है।

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8. भारत में ADR का संवैधानिक आधार क्या है?

उत्तर: ADR को निम्नलिखित द्वारा समर्थन प्राप्त है:
अनुच्छेद 39-A: निर्धन व्यक्तियों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता का प्रावधान।
अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार, जिसमें त्वरित न्याय तक पहुंच शामिल है।
जस्टिस वी.आर. कृष्णा अय्यर और भगवती द्वारा सुझाई गई कानूनी सहायता सेवा कार्यान्वयन समिति (CILAS) ने ADR को बढ़ावा दिया।

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9. ADR के मुख्य तरीके क्या हैं?

उत्तर:
मध्यस्थता (Arbitration)
सुलह (Conciliation)
मेडिएशन (Mediation)
बातचीत (Negotiation)
लोक अदालत के माध्यम से न्यायिक निपटारा
ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR)
फास्ट ट्रैक मध्यस्थता
वर्चुअल कोर्ट

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10. मध्यस्थता (Arbitration) को परिभाषित करें।

उत्तर: मध्यस्थता एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पक्षकारों के आपसी समझौते से मध्यस्थता अधिकरण द्वारा विवाद का निपटारा किया जाता है, जहां निर्णय (पुरस्कार) पक्षकारों पर बाध्यकारी होता है, लेकिन यह अदालत द्वारा नहीं दिया जाता।

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11. मध्यस्थता और मुकदमेबाजी में क्या अंतर हैं?

उत्तर:
विशेषज्ञता: मध्यस्थता में तकनीकी विवादों के लिए विशेषज्ञ नियुक्त किए जा सकते हैं, जबकि मुकदमेबाजी में न्यायाधीशों को विशेषज्ञता की कमी हो सकती है।
लचीलापन: मध्यस्थ पक्षकारों की सहमति से संविदात्मक अधिकारों में संशोधन कर सकते हैं, जबकि अदालतें कानूनी अधिकारों के आधार पर सख्ती से निर्णय देती हैं।
बाध्यकारी प्रकृति: मध्यस्थता पुरस्कार बाध्यकारी हैं, लेकिन सीमित आधारों (जैसे अधिकार क्षेत्र की कमी) पर अपील की जा सकती है, जबकि मुकदमेबाजी में औपचारिक प्रक्रियाएं होती हैं।

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12. कौन से मामले मध्यस्थता के लिए संदर्भित नहीं किए जा सकते?

उत्तर:
दिवालियापन कार्यवाही
प्रोबेट कार्यवाही
वैवाहिक मामले (तलाक/अलगाव के निपटान को छोड़कर)
औद्योगिक विवाद
अभिभावक नियुक्ति की कार्यवाही

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13. मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की प्रमुख धाराएं कौन सी हैं?

उत्तर:
धारा 11: मध्यस्थों की नियुक्ति।
धारा 10: मध्यस्थों की संख्या।
धारा 12–15: मध्यस्थों की चुनौती और हटाने का प्रावधान।
धारा 20: मध्यस्थता का स्थान।
धारा 21: मध्यस्थता कार्यवाही की शुरुआत।
धारा 30: मध्यस्थता के दौरान बातचीत, मेडिएशन या सुलह द्वारा निपटारा।
धारा 31: मध्यस्थता पुरस्कार का प्रारूप और सामग्री।
धारा 32: मध्यस्थता कार्यवाही का समापन।
धारा 34: मध्यस्थता पुरस्कार को रद्द करने के लिए आवेदन।
धारा 37: अपील के आधार (जैसे, अधिकार क्षेत्र की कमी)।

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14. सुलह (Conciliation) क्या है?

उत्तर: सुलह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पक्षकार स्वतंत्र तीसरे पक्ष या संस्था की मदद से सौहार्दपूर्ण समझौता करते हैं, बिना किसी बाध्यकारी निर्णय के।

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15. सुलह की वैधानिक मान्यता क्या है?

उत्तर:
औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
पारिवारिक न्यायालय अधिनियम, 1984
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1976, 1999, 2002 में संशोधित)
कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987
मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996
MACT दावे

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16. सलेम बार एसोसिएशन मामले का महत्व क्या है?

उत्तर: *सलेम बार एसोसिएशन, तमिलनाडु बनाम भारत सरकार (2005)* में, सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों को जस्टिस जगनाथ राव समिति द्वारा प्रस्तावित नियमों को अपनाने का निर्देश दिया ताकि CPC की धारा 89 के तहत ADR उपायों, जैसे मेडिएशन और सुलह, को लागू किया जा सके।

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17. लोक अदालत क्या है?

उत्तर: लोक अदालत कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत एक मंच है, जहां सुलह या मेडिएशन के माध्यम से विवादों का सौहार्दपूर्ण निपटारा किया जाता है, और पुरस्कार बाध्यकारी और गैर-अपील योग्य होता है, सिवाय धोखाधड़ी या गलती के मामलों में।

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18. क्या आपराधिक मामले ADR द्वारा निपटाए जा सकते हैं?

उत्तर: हां, लोक अदालत Cr.P.C की धारा 320(1) के तहत समन्वय योग्य आपराधिक अपराधों को संभाल सकती है।

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19. लोक अदालत के क्या लाभ हैं?

उत्तर:
कोर्ट शुल्क वापस किया जाता है।
विवादों का त्वरित समाधान।
पुरस्कार बाध्यकारी हैं और अपील सीमित है (केवल धोखाधड़ी या गलती के मामले में)।

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20. मेडिएशन (Mediation) को परिभाषित करें।

उत्तर: मेडिएशन एक अनौपचारिक प्रक्रिया है जिसमें एक प्रशिक्षित मेडिएटर पक्षकारों के बीच संचार को सुगम बनाता है ताकि वे मतभेदों को समझें और स्वैच्छिक, बातचीत आधारित समझौता करें। मेडिएटर कोई निर्णय थोपता नहीं है।

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21. मेडिएटर की भूमिका क्या है?

उत्तर: मेडिएटर स्वैच्छिक विवाद समाधान को सुगम बनाता है:
प्रत्येक पक्ष के विचारों को संप्रेषित करना।
मुद्दों की पहचान और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करना।
गलतफहमियों को कम करना।
समझौते के क्षेत्रों की खोज करना।
समझौते के लिए विकल्प उत्पन्न करना बिना शर्तें थोपे।

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22. मेडिएशन की समय सीमा क्या है?

उत्तर: मेडिएशन आमतौर पर पहली उपस्थिति से 60 दिनों के भीतर समाप्त हो जाती है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर 30 दिन और बढ़ाया जा सकता है।

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23. मेडिएशन की शैलियां क्या हैं?

उत्तर:
सुविधाजनक दृष्टिकोण: मेडिएटर प्रक्रिया का मार्गदर्शन करता है बिना मामले के गुण-दोष का मूल्यांकन किए।
मूल्यांकनात्मक दृष्टिकोण: मेडिएटर पक्षकारों को समझौता करने में मदद करने के लिए मूल्यांकन या राय प्रदान करता है।

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24. बातचीत (Negotiation) क्या है?

उत्तर: बातचीत एक स्वैच्छिक, गैर-बाध्यकारी संचार प्रक्रिया है जिसमें पक्षकार सीधे चर्चा करते हैं और विवादों का समाधान करते हैं, प्रक्रिया और परिणाम दोनों को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण: शिमला समझौता और लाहौर घोषणा।

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25. बातचीत में BATNA और WATNA क्या हैं?

उत्तर:
BATNA: सर्वश्रेष्ठ वैकल्पिक समझौता (Best Alternative to a Negotiated Agreement) यदि बातचीत विफल हो तो सर्वश्रेष्ठ परिणाम।
WATNA: सबसे खराब वैकल्पिक समझौता (Worst Alternative to a Negotiated Agreement) यदि बातचीत विफल हो तो सबसे खराब परिणाम।

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26. बातचीत की वैधानिक मान्यता क्या है?

उत्तर:
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (धारा 23)
विशेष विवाह अधिनियम, 1954 (धारा 34)
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (आदेश XXXIIA, नियम 3)
पारिवारिक न्यायालय अधिनियम, 1984
कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (धारा 19)
मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996

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27. भारत में पहली लोक अदालत कब आयोजित की गई थी?

उत्तर: पहली लोक अदालत 1982 में गुजरात में और 1985 में आंध्र प्रदेश (विशाखापट्टनम) में आयोजित की गई थी।

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28. ADR के मूल सिद्धांत क्या हैं?

उत्तर:
स्वैच्छिक भागीदारी: पक्षकारों को स्वेच्छा से भाग लेना चाहिए।
गोपनीयता: चर्चाएं निजी रहती हैं।
तटस्थता: तीसरा पक्ष (मेडिएटर/मध्यस्थ) निष्पक्ष रहता है।
स्व-निर्णय: पक्षकार परिणाम तय करते हैं, न कि सुगमकर्ता।

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29. मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

उत्तर:
तीन पुराने मध्यस्थता कानूनों को समेकित और प्रतिस्थापित करता है।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मध्यस्थता के लिए UNCITRAL मॉडल को अपनाता है।
बाध्यकारी मध्यस्थता पुरस्कार प्रदान करता है, जिसमें अपील के सीमित आधार हैं।

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30. हाइब्रिड ADR प्रक्रिया क्या है?

उत्तर: हाइब्रिड ADR प्रक्रिया प्राथमिक विवाद समाधान विधियों (जैसे मेडिएशन और मध्यस्थता) को मिलाकर विशिष्ट विवादों के लिए समाधान तैयार करती है। उदाहरण: मेड-आर्ब, जहां पहले मेडिएशन की कोशिश की जाती है, और यदि अनसुलझा रहता है, तो मध्यस्थता की जाती है।

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ADR वाइवा के लिए तैयारी टिप्स:

परिभाषाओं पर ध्यान दें:  

मध्यस्थता, सुलह, मेडिएशन और बातचीत जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से समझें और व्यक्त करें।
कानूनी ढांचे को जानें: 

मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996, CPC, और अन्य क़ानूनों की प्रासंगिक धाराओं से परिचित रहें।
व्यावहारिक अनुप्रयोग: 

वास्तविक जीवन के परिदृश्यों (जैसे सलेम बार एसोसिएशन मामला) और पारिवारिक या व्यावसायिक विवादों में ADR के उपयोग का अध्ययन करें।
मुख्य धाराओं को याद करें: 

मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 10, 11, 12–15, 20, 21, 30–34, और 37 अक्सर पूछी जाती हैं।
संक्षिप्त रहें: सीधे उत्तर दें और प्रासंगिक उदाहरणों या वैधानिक संदर्भों के साथ समर्थन करें।

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